फाइलों से ज़्यादा फील्ड में दिखते हैं डीएम साहब: भागलपुर को नई रफ्तार देने वाले डॉ. नवल किशोर चौधरी

पूर्णेन्दु/भागलपुर : अगर आज भागलपुर की गलियों, सड़कों और दफ्तरों में विकास की हलचल दिख रही है, तो इसके पीछे एक नाम बार-बार सामने आता है—डीएम डॉ. नवल किशोर चौधरी। ऐसे अधिकारी, जिन्हें लोग “एसी कमरे वाले डीएम” नहीं, बल्कि “फील्ड में दौड़ते-भागते डीएम” के नाम से जानते हैं।

डॉ. नवल किशोर चौधरी की खासियत यही है कि वे कुर्सी पर कम और ज़मीन पर ज़्यादा नज़र आते हैं। कभी सुबह-सुबह निरीक्षण, कभी अचानक छापेमारी, तो कभी आम लोगों से सीधा संवाद—उनका अंदाज़ बिल्कुल अलग है। यही वजह है कि अधिकारी हों या कर्मचारी, सभी अलर्ट मोड में रहते हैं और काम समय पर होता है।

भागलपुर में जो विकास की रफ्तार आज दिख रही है—चाहे सड़क, साफ-सफाई, कानून-व्यवस्था या सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन—उसमें डीएम की सक्रिय भूमिका साफ दिखाई देती है। वर्षों से लटकी योजनाओं को न केवल फाइलों से बाहर निकाला गया, बल्कि उन्हें ज़मीन पर उतारने का काम भी तेज़ी से हुआ।

सरकारी दफ्तरों की तस्वीर भी बदली है। अब काम टालने की बजाय समय पर निपटाने की संस्कृति दिखने लगी है। आम जनता की शिकायतें हों या जनहित से जुड़े मामले—डीएम खुद मॉनिटरिंग करते हैं, जिससे भरोसा भी बढ़ा है और व्यवस्था भी दुरुस्त हुई है।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि डॉ. चौधरी प्रशासन को बोझ नहीं, सेवा का माध्यम मानते हैं। यही वजह है कि वे युवाओं, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से संवाद को प्राथमिकता देते हैं। उनका मानना है—जब जनता साथ हो, तो विकास अपने आप तेज़ हो जाता है।

आज भागलपुर को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ता देख लोग यही कहते हैं—
“डीएम हो तो ऐसे हों!”
डॉ. नवल किशोर चौधरी का कार्यकाल न सिर्फ़ प्रभावशाली है, बल्कि आने वाले समय में इसे एक यादगार और ऐतिहासिक प्रशासनिक दौर के रूप में देखा जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *